यहा विचारो का मिलन नही यहा बस नजरो का मिलन होता है

अरे चुप क्यो हो बोलो न अरे खामोश क्यो हो कुछ कहो न अरे फिर मैं कैसे समझूंगा की तूम कुछ कहना चाहती हो,तुम्हारे अल्फाजो को सुनने के लिये मेरे कान तरस रहे है,बिना वार्तालाप के विचारो का आदान प्रदान संभव नही  है,तो फिर तुम ही बोलो मैं क्या करूं यू ही तुम्हे चोरी चुपके निहारने का कार्य जारी रखूं या फिर बात को आगे बढाऊ किन्तु कैसे? असमंजस मैं हू क्षमा करना मैं असमर्थ हू,मै अपनी बातो को तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत करने मे सक्षम नही हू,क्योंकि न सुनने की हिमाकत नही है मुझमे अंदर से टूटना नही चहता,बस यू ही मैं दूर से ही तुम्हे देखना चाहता हूं जब पास से गुजरती हो तो दिल की धड़कने एकाएक तेज हो उठती है,किन्तु बेबसी का मारा मैं अपनी नजरे झुकाए आगे निकल जाता हू क्योंकि मैं असमर्थ हू।किन्तु जैसे ही तुम्हारे नजरो से मेरे नजरो का मिलाव होता  है तो उस समय भी मेरी शारीरिक हालत नाजुक हो जाती है। दो नयनो के बीचजो मिलाव का क्षण होता है काश वह क्षण कुछ समय के लिए रूक जाता ताकि मैं तुम्हे यू ही निहारता रहूं,ताकि मैं तुम्हारी नयनो  के सागर मे डूब जाऊं और सारी बातो को भूलाकर तुम्हे अपनी अंतर आत्मा की बात बाता दू किन्तु ऐसा क्षण केवल काल्पनिक जीवन मे ही संभव है इसका वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नही है।खैर कोई बात नही हमारे तुम्हारे विचारो का मिलन हो अथवा नही किन्तु नयनो का मिलाव यू ही परस्पर जारी रहेगा,यू चोरी चुपके एक दूसरे को निहारना यू ही जारी रहेगा। (To Chasmish)



                                 आपका अपना  मनीष आर्या

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