कल प्रातःकालीन पार्क का नजारा

दिनांक 5/5/2019
समय 2:01 a.m
       (यह सारांश कल सुबह की है)
                      आज फिर पूरी रात जगा रहा पिछले लगातार तीन दिनो से यही हाल है,आज सुबह साईकिल लेकर मोरहाबादी मैदान की ओर निकल पड़ा शुक्रवार को आए फैनी तुफान का ही कहर था कि सुबह का मौसम बहुत ही सुहावना और मनमोहक था,साईकिल चलाने के दरम्यान सुबह ठंडी ठंडी हवा पूरे बदन मे प्रवेश कर रही था और मैं ठंड से कांपते हुए डगमगाते हुए किसी प्रकार से मोरहाबादी तक पहुंच पाने मे सफल रहा।सर्वप्रथम मोरहाबादी मैदान के समीप स्थित स्टेडियम के समक्ष जाकर लम्बी लम्बी कतार मे लगी बसो और अन्य गाड़ियों को देखकर स्तब्ध रह गया,फिर मुझे ज्ञात हुआ कि यह सारे गाड़ी चुनावी उद्देश्य के कारण खड़ी है,जाहिर सी बात थी विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक देश मे  सबसे बड़े लोकतंत्र का त्यौहार जो होने वाली थी।लोकतंत्र के इस त्यौहार का हिस्सा अब मै भी बनूंगा इस बात की अनुभूति होते ही मैं अन्दर से गौरवान्वित महसूस करने लगा कुछ क्षण वहा व्यतीत करने के पश्चात मे पुनः साईकिल मे फूल पैतील मारते हुए अक्सिजन पार्क जा पहुंचा,साईकिल मे ताला मारकर मैं अन्दर पार्क मे प्रवेश कर गया।

                                                    आज न व्यायाम किया और न ही मैदान की चक्कर लगाई भाई आज तो मैं मस्त पार्क मे स्थित सीढ़ीनुमा चौखट पर बैठा और आपने आसपास के चीजो करीब निहारने लगा।मैने क्या क्या देखा???

पार्क,पार्क मे लोग गेट से प्रवेश कर रहे है।
कोई बैट लेकर आ रहा है, तो कोई फुटबाल लेकर आ रहा है।
कोई बैडमिंटन लेकर आ रहा है,तो कोई वॉलीबाल लेकर।
कोई पापा के साथ आ रहा है,तो कोई मम्मी के साथ,
कोई दोस्त के साथ,तो कोई दादा और दादी के साथ,
कोई अकेले आ रहा तो कोई,आज आने का प्लान बनाकर भी बिस्तर पर मस्त लेटा हुआ है।
कोई दौड रहा है,कोई कूद रहा है,कोई टहल रहा है,
कोई बैठा हुआ है,तोकोई सोया हुआ है।
कोई व्यायाम कर रहा है,कोई प्राणायाम कर रहा है।
कोई बात कर रहा है,कोई साथ दे रहा है,
कोई चाय बेच रहा है,तो कोई अख़बार पढ़ रहा है।
कोई तलाब के पास बैठा है,कोई अपने प्रेमिका के साथ
बैठा है,तो कोई इस आश मे बैठा है की आज अपना सैटीग करके ही वापस जाऊगा।
कोई सुरज के दीदार करने को बेताब है,
कोई दिन मे भी अपनी चांद को देखने बेकरार है,
तो कोई तलाब मे मछली देखकर लालायित है।
और मैं अभी भी सबको देख रहा हू उस दर्शक की भांति जिसके सामने माने कोई फिल्मी पर्दा लगया गया हो फिर अचानक से भैया का कॉल आया फिल्म इन्टवल तक ही चल पाई फिर क्या आदेश जारी हो चुका था बुलावा आ गया था मैने तुरंत ताला खोलकर जो पैटील मारी फिर मेरी साईकिल सीधे मेरे लोवर वर्धमान कम्पाउंड स्थिति लोज के समीप आकर रूकी।तो भाईया यह था कल का प्रातः सुबह मे पार्क का नजारा।अगले अध्यय के लिए जुड़े रहे मनीष भैया जल्द ही पुनः आपके समक्ष उपस्थित होगे तबतक आप अपना ख्याल रखे हस्ते रहे स्वास्थ्य रहे ।
     
                                              आपका अपना
                                                    मनीष

Comments

  1. मनीष भाई आपने काफी उम्दा प्रयास किया है
    हिंदी लेखन का एक सौन्दर्य पूर्ण व्यख्या प्रस्तुत किया हैं
    आपने महज कुछ ही शब्दों में पूरे पार्क में हो रहे हलचल को अपने शब्दों में गढ़ा हैं जो काफी सराहनीय हैं।।
    हमे आगे की प्रस्तुति का बेसबरी से ििइंतजार रहेगा।।

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  2. बस निरंतर इसी प्रकार आपनी प्रतिक्रिया देते रहे,आपकी प्रतिक्रिया से मुझमे एक नवीन उर्जा का संचार होता है जो शब्दो के रूप मे प्रकट होकर blogs मेरे अंकित हो जाता है ।पुनः धन्यवाद मित्र

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