जेपीएससी से जुड़ा नया विवाद

जब जेपीएससी की रिजल्ट निकली तो कई राज्य प्रशासनिक सेवा में अपना योगदान देने के लिए ललाहित युवाओं में एक उम्मीद कि किरण जाग उठी थी कि चलो अब जेपीएससी की तैयारी शुरू करते है किन्तु कल के अख़बार में छठी जेपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा परिणामों में हुई गड़बड़ी की खबर सुन कर जेपीएससी के ऊपर चढ़ा विश्वाश बस कुछ समय में ही उतर गया ।

जेपीएससी और झारखण्ड :-

यूं तो राज्य गठन के बीस साल हो गए है और इन बीस सालो में जेपीएससी द्वारा बीस बार परीक्षाओं का आयोजन किया जाना था किन्तु अभी तक हुए कुल पांच परीक्षाओं और उसके परिणामों ने हमेशा सुर्खियों बटोरी है, हालाकि ये सुर्खियां विवादों के रूप में बटोरी है, नियमित परीक्षा न होने के परिणाम स्वरूप राज्य सरकार के कई विभागों में कई प्रशासनिक अधिकारियों का पद ख़ाली रह जाते थे जिसका परिणाम राज्य की विधि व्यवस्था पर पड़ता था। कई विभागों के काम प्रशासनिक अधिकारियों की कमी के कारण लटकी हुई रह जाती थी।

क्या है वर्तमान विवाद:-

 वर्तमान में छठी जेपीएससी प्रतियोगिता का परीक्षा तो वर्ष २०१६ में ही ले ली गई थी किन्तु लगातार विवादों से घिरा जेपीएससी अपने परीक्षा परिणामों को भला एक वर्ष के अंदर कैसे निकाल सकता था तो आखिकार जब २०२० के अप्रैल महीने में जेपीएससी द्वारा परिणाम की घोषणा की गई तो सफल हुए प्रतिभागियों के साथ साथ जेपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुटे सारे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ उठी किन्तु महज चार दिनों बाद खबर मिलती है कि छठी जेपीएससी के परिणामों में भी अनियामनिता बरती गई, जिसमें सफल छात्र को असफल और असफल को सफल घोषित कर दिया गया, जिस मेरिट लिस्ट में पेपर १ में महज पास करना होता है जिसका नंबर नहीं जोड़ना था उसको भी मेरिट लिस्ट में शामिल कर दिया गया और तो और ज्यादा नंबर लाए हुए प्रतिभागियों को प्रशानिक पद के बदले वित्तीय विभाग का पद दिया गया है। 
          इस अनियमनिता के सामने आने के बाद पुनः जेपीएससी की प्रति छात्रों का गुस्सा फुट चुका है अगर लॉक डाउन नहीं रहता तो रांची की सड़कों पर छात्रों का प्रदर्शन ज़रूर होता वैसे जब मुख्य परीक्षा की घोषणा कि गई थी उसी समय कई छात्र संगठनों ने विरोध किया था ।
                                      खैर ताज़ा जानकारी देते हुए कहना चाहूंगा कि जेपीएससी ने कैटिगरी (ओबीसी) कट ऑफ मार्क्स  594 से 593 कर दिया है ताकि विवादों से बचा जा सके भला जिस जेपीएससी के ऊपर इसके गठन और इसके द्वारा आयोजित प्रथम परीक्षा परिणामों से है संबधित विवादों में घिरा रहने कि आदत है भला वह इस वर्ष भी विवादों में न फंसे ये कैसे संभव हो सकता था।
   
ख़ैर इतने सारे विवादों को दरकिनार करते हुए छात्र तैयारियों में जुट गए है छात्रों में अभी भी उम्मीद कायम है वे अगले जेपीएससी प्रतियोगिता में सफल होंगे और राज्य सरकार में अपना योगदान दे कर राज्य की सेवा करेंगे सपने संजोए रखे इन छात्रों को अपने मेहनत और काबिलियत पर पूरा भरोसा है किन्तु जेपीएससी से जुड़े विवादों को सुन इन छात्रों के अंदर जगा उत्साह और जुनून टूट जाता है उनका हौसला घट जाता है। पता नहीं वह दिन कब आएगा जब जेपीएससी बिना विवादों से घिरे हुए अपना परिणाम घोषित करेगा ।

Comments

  1. It is good to hear 👂 from one of the youngster of jharkhand who is really aware of its conditions and spreading awareness and his knowledge to others.

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