"सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना हमारा मक़सद नहीं हमारी कोशिश है कि सूरत बदलनी चाहिए "

 

"सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना हमारा मक़सद नहीं हमारी कोशिश है कि सूरत बदलनी चाहिए " दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति आज भी युवाओं में जोश भर देती है, आज पूरे दिन सोशल मीडिया (ट्विटर) पे युवाओं द्वारा एक कैंपेन चलाया गया, मुद्दा था परीक्षा, वैसे यह मुद्दा कोई नया नहीं है इस देश के युवा हर अन्याय जुल्म भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया दी है चाहे वो देश का स्वतंत्रता संग्राम हो, जेपी आंदोलन हो, अन्ना आंदोलन हो, या फिर निर्भया को इंसाफ दिलाने की मांग सभा से लेकर सड़क तक देश के युवा पीढ़ी अपनी मांगो को लेकर आंदोलन करते रहे है, आज कोरों ना महामारी के बीच जहां पूरा देश लॉकडाउन की प्रक्रिया से गुजर रहा है और ऐसे स्थिति में भी देश के युवा पीढ़ी अपने हक और अधि कार को लेकर गंभीर है, यू तो सोशल मीडिया पे कैंपेन कोई नया नहीं है इससे पहले भी मी टू जैसे कई कैंपेन चलते आए है किन्तु आज का कैंपेन कई मायने में नया था, क्यों की आज का अभियान देश के भविष्य से जुड़ा हुआ था, यह वह युवा थे जिन्होंने वर्ष २०१९ में ही एनटीपीसी और एसएससी के फार्म को भरा था जहा पहले की अभी तक परीक्षा नहीं ली गई थी और दूसरे की परिणाम जारी नहीं किया गया था, ऐसे में छात्रों में गुस्सा फूटना लाज़मी था क्यों कि जहां महामारी के कारण कई लोग बेरोजगार हो रहे है ऐसे स्थिति में तय समय में परीक्षा होना और परिणाम का जारी न  होना है छात्रों के अंदर हिम्मत को तोड़ने के समान है, जहां एक ओर सरकारी नौकरी की कमी हो रही है और सरकार हर चीज़ प्राइवेट को सौंपने को उतारू है ऐसी स्थिति में छात्रों के अंदर एक उग्र भावना का प्रसार होना लाजमी था । पिछले दिन भी जेई और नीट का कैंपेन युवाओं द्वारा चलाया गया था जो निरर्थक साबित हुई, ख़ैर युवा की आवाज़ बुलंद हो रही है यह बात हमारे हुकमरानों को भी पता चल गया है और बस अब इनकी मांगो की पूर्ति कब होगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

जोहार

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