आधुनिक भारत का जालियांवाला बाग हत्याकांड

 

झारखंड पूरे देश में एक मात्र ऐसा राज्य  है जिसके गठन की मांग आज़ादी के पूर्व से लेकर आज़ादी के बाद कई दशकों तक चली, इस दौरान कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, कई लोगों ने अपने घर परिवार को छोड़ अलग राज्य के आंदोलन  में कूद पड़े । कई सारे चरणों से गुजरने के बाद और कई सारे लोगों के प्रयास और संघर्षों के बदौलत ही झारखंड राज्य का गठन संभव हो पाया, और जब बात झारखंड राज्य गठन की हो तो सरायकेला खरसावां गोलीकांड को कैसे भुलाया जा सकता है, सरायकेला खरसावां गोलीकांड जिसे आधुनिक भारत का जालियांवाला बाग हत्याकांड भी कहा जाता हैं झारखंड के इतिहास में इसकी प्रासंगिता को कभी भुलाया नही जा सकता है।

यू तो झारखंड राज्य का गठन विभिन्न चरणों से गुजरा,किन्तु जब आंदोलन अपने दूसरे चरण में प्रवेश किया तब देश आज़ाद हो चुका था, वह वर्ष था १९४८ ( १ जनवरी) जब पूरा देश आज़ादी और नव वर्ष का जश्न मना रहा था उस वक्त सरायकेला खरसावां के लोग उड़ीसा और केंद्र सरकार के विरोध में आंदोलन कर रहे थे।

आखिर क्यों विरोध हो रहा था?

अंग्रेजो के द्वारा भारत को स्वतंत्र करने की घोषणा करते ही, देश में देशी रियासतों को भारतीय गणराज्य में शामिल करना सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी, और अन्य रियासतों की भांति ( कुछ को छोड़ कर) सरायकेला खरसावां रियासत के राजा भी  सरदार पटेल के आवाह्न पे अपनी रियासत को भारत में  शामिल करने को तैयार हो गए। किन्तु सरायकेला खरसावां के राजा अपने रियासत को तत्कालीन बिहार में विलय करने के बजए उड़ीसा में शामिल करना चाहते थे किन्तु उन रियासतों में रह रहे लोगों को ये कतई मंजूर नहीं था, और इसी के विरोध में १ जनवरी को खरसावां हाट में विशाल रैली का आयोजन किया गया था। जिसे ओलंपियन सह नेता मरांगे मरांग जयपाल सिंह मुंडा संबोधित करने वाले थे। गौरतलब है कि अलग राज्य झारखंड की मांग १९११ से ही शुरू हो गई थी आज़ादी के पूर्व से चली आ रही अलग राज्य की मांग देश आज़ाद होने के बाद और तीव्र हो गई जब राज्यो के पुनर्गठन के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था।

आखिर क्यों इसे आज़ाद देश की जालियांवाला बाग हत्याकांड कहा जाता है??


१३ अप्रैल को शांति पूर्ण तरीके से अंग्रेजो के काले कानून के ख़िलाफ़ पंजाब प्रांत के  लोग  अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, और इस विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए जनरल डायर ने निहते आंदोलनकारियों को गोली चलाने का आदेश दे डाला ठीक जिससे सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवा दी ठीक उसी प्रकार से उड़ीसा की तत्कालीन कांग्रेस की नेतृव वाली सरकार ने पूरे इलाके में मर्शियल लॉ लगा दिया और जयपाल सिंह मुंडा को रैली को संबोधित करने के पूर्व ही नजरबंद कर दिया, पुलिस का एक बड़ा दस्ता रैली स्थल पे भेजा गया । पुलिस ने आंदोलनकारियों को रैली समाप्त करने की चेतावनी दी किंतु आंदोलनकारी अपने नेता की आस में डटे रहे। फिर क्या था पुलिस ने आंदोलनकारियों पे गोलियां बरसाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पूरे हाट में लाशों की ढेर बिछ गई, स्थानीय लोगों की माने तो इसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी किन्तु सरकारी अधिकारी इसे मानने तैयार नहीं करते थे। पास में स्थित एक कुएं में लोगों की लासो को भरा गया था, कई सारे लोगों को पास के जंगलों में पुलिस के द्वारा ही दफना दिया गया। चुकीं जालियांवाला बाग और सरायकेला खरसावां के आंदोलन में शामिल लोगों का एक समान मूल उद्देश्य था (केंद्रीय सरकार के निर्णय का विरोध) व आंदोलन के को दबाने के लिए दोनों घटना स्थल पे सरकार द्वारा अंधाधुन गोलियों की बौछार कर लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया  इसीलिए १ जनवरी के सरायकेला खरसावां को आज़ाद देश का जालियांवाला बाग हत्याकांड भी कहा जाता है।

इस हत्याकांड के बाद लोगों में सरकार के ख़िलाफ़ रोश बढ़ गया, लोगो के रोश को बढ़ता देख अंततः सरकार ने सरायकेला खरसावां को बिहार में विलय कर दिया गया किन्तु झारखंड राज्य के आंदोलनकारियों की मांग यही नहीं रुकी और बाद में झारखंड पार्टी, जेएमएम और आजसू के नेतृव में अलग राज्य की मांग में तीव्रता आई और इन्हीं लोगों के प्रयास के फल स्वरूप वर्ष १००० में झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अपने अस्तित्व में आया। बाद में इस आंदोलन में मारे गए लोगों को शहीद की संबोधित किया जाने लगा और हर वर्ष १ जनवरी को जब पूरा देश खुशी में झूम रहा होता है तब झारखंड के लोग उन शहीदों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
किन्तु अभी भी राज्य के कुछ हिस्से उड़ीसा और बंगाल (मयुरबंज और पुरलिया) में है जिसको झारखंड राज्य में शामिल करने के लिए आज भी कभी कभार राज्य के आंदोलनकारियों द्वारा समय समय में मांग की जाती है।

Comments

Post a Comment

Popular Posts