मधुपुर उपचुनाव ने झारखंड की राजनैतिक पारा को बढ़ा दिया है

 

मधुपुर उपचुनाव  ने इस ठिठुरा देने वाली ठंड में भी झारखंड की राजनैतिक पारा को चढ़ दिया है, सभी दलों से कई सारे प्रत्यासी खुद को उम्मीदवार मानते हुए लगातार जनता से संपर्क साध रहे है, गौरतलब है कि राज्य सरकार में मंत्री रहे हाजी हुसैन अंसारी जी के मृत्यु के पश्चात मधुपुर की सीट पिछले कई महीनों से खाली है ।हालांकि चुनाव आयोग द्वारा अभी तक उपचुनाव की घोषणा नहीं हुई है, फिर भी प्रमुख दलों के नेता लगातार अपने पक्ष में जनता को आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

आखिर क्यों मधुपुर उपचुनाव झारखंड की राजनीति में अहमियत रखता है?
इसी साल कुछ महीने बाद बंगाल विधानसभा की चुनाव होने वाली है, बंगाल का क्षेत्र झारखंड के कई सारे क्षेत्रों से सटा हुआ है जहां बीजेपी इस उपचुनाव को जीतकर बंगाल के चुनाव में प्रवेश करना चाहती है तो वहीं महागठबंधन दल के नेता बीजेपी कि विजय रथ को पुनः रोकने का पुर जोर कोशिश करेगी जैसा की उन्होंने बेरमो और दुमका उपचुनाव में किया था।

लगातार दो दो उपचुनाव हार चुकी बीजेपी मधुपुर में पूर्व मंत्री रहे राज पलिवार को पुनः जितने का प्रयास करेगी तो वहीं पूर्व में बीजेपी के साथी रहे आजसू पार्टी बीजेपी के लिए सबसे बड़ी सिर दर्द बन कर उभरी है क्यों की आजसू की तरफ़ से गंगा नारायण जी लगातार जनता को व्यक्तिगत स्तर से आर्थिक और  अन्य प्रकार के सहयोग कर लगातार जनता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे है अब देखना ये होगा कि क्या आजसू बीजेपी में समझौता होता है या पूर्व चुनाव की भांति फिर से दोनों दल अलग अलग चुनाव लडेगी? वहीं जेएमएम की तरफ से विधानसभा प्रभारी सह हाजी जी पुत्र हसन जी मैदान में उतर सकते है ।

कई दलों में कई सारे लोग दावा ठोक रहे हैं बीजेपी से राज पलिवार जी के साथ साथ संसद निशिकांत दुबे के करीबी माने जाने वाले संजय यादव भी लगातार जनता के सपर्क साध रहे है वहीं जेएमएम से एक और व्यक्ति खुद को पार्टी का दावेदार बता रहे हैं।
अगर बीजेपी और आजसू अलग अलग लड़ी तो शायद इस बार फिर से महागठबंधन प्रत्यासी को फायदा मिल जाएगा जैसा की पूर्व की चुनाव में हुआ रहा, लेकिन इस बार जनता का झुकाव गंगा नारायण कि तरफ़ ज्यादा है बहरहाल आजसू पार्टी पूरे चुनावी मूड में है शायद आजसू मधुपुर सीट से समझौता नहीं करने के मूड में है, राज्यसभा और दो उपचुनाव सीटों में आजसू ने बीजेपी को अपना समर्थन दिया था और इसी बात का हवाला देकर आजसू पार्टी ने मधुपुर सीट में अपना दावा ठोक रही है वहीं आजसू के पूर्व प्रयात्सी रहे गंगा नारायण पे हरे और भगवे दोनों रंगो ने अपनी नजर लगाई हुई है कल मधुपुर में होने वाले केंद्रीय बैठक में अगर आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो गंगा नारायण को आजसू पार्टी की ओर से प्रत्यासी घोषित नहीं करती है तो शायद गंगा नारायण भी किसी दल या फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप से मैदान में खुद सकते है और इसके अवज में आजसू बीजेपी से बंगाल चुनाव में पुर्लिया जिले की कुछ सीटें मांग सकती है, लेकिन शायद आजसू ऐसा नहीं करेगी क्यों की आजसू पार्टी का जनाधार झारखंड में पिछले चुनाव से कम हुई है और संथाल परगना क्षेत्र में पार्टी को मजबूत बनाने के लिए मधुपुर सीट जितना पार्टी के भविष्य के लिहाज से बंगाल से ज्यादा जरूरी है क्यों कि मधुपुर की जीत पार्टी को बंगाल में अपने स्तर से चुनाव लडने में सहायक साबित हो सकती है और वैसे भी आजसू की राजनीति झारखंड से चलती है ना की बंगाल से ऐसी गलती पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो कतई नहीं करेंगे।

आखिर कहा है बीजेपी के पूर्व प्रत्यासी?

जहां गंगा नारायण, हसन जी और संजय यादव लगातार जनता से संपर्क साध रहे हैं वहीं दूसरी ओर बीजेपी के पूर्व प्रत्यसी  रहे राज पलिवार कहीं नजर नहीं आ रहे है उनके अनुपस्थिति में उनके पुत्र ऋषव लगातार युवाओं से संपर्क साध रहे हैं और अवाम को अपने ओ र आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं दरअसल राज पलिवार जी के पत्नी की तबीयत विगत कुछ महीनों से ठीक नहीं चल रही थी उन्हीं के बेहतर इलाज के लिए राज पलिवार जी दिल्ली में गए हुए हैं। खैर उनकी अनुपस्थिति में उनके पुत्र जनता से संपर्क साध रहे हैं जिसका फायदा उनको आगामी उपचुनाव में मिल सकता है।

         अब देखना ये होगा कि आखिर कौन सा दल या व्यक्ति मधुपुर उपचुनाव में बाजी मारता है अगर राजनैतिक विशेषज्ञओ की माने तो इस बार का चुनाव पार्टी नहीं अपितु व्यक्ति बनाम व्यक्ति होगा एक तरफ गंगा नारायण होंगे तो दूसरी तरफ राज पलिवार और हसन जी । खेर जीते कोई भी जीत का अंतर इस बार २०,००० नहीं होगा जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था।

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