बंगाल विभाजन और वर्तमान झारखंड से जुड़ी इसकी समकालीन स्थित
बढ़ती हुई शिक्षा के साथ जब राज्य पर्याप्त मात्रा में युवाओं को उनके कौशल के अनुरूप रोजगार मुहैया न करा पाए तो बेरोजगार युवाओं की नज़र राज्य की उन नीतियों के ऊपर जाती है जिससे समकालीन समय में राज्य आर्थिक दुर्गति और गरीबी की जाल में फसता नज़रआता है, ऐसे समय में एक युवा राज्य के विभात्स्य स्थित का पूर्वाग्रह कर लेता है और राजनैतिक व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए उत्सुक हो जाता है। मौजूदा दौर के विपक्ष भी जब युवाओं के आकांक्षाओ को मूर्त रुप देने का प्रयत्न न करे और राज्य सरकार के निर्णय लॉर्ड कर्जन के नीतियों से प्रभावित हो और या राज्य के ब्यूरोक्रेट्स की भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरें रोजाना अखबारों में देखने को मिले जो झारखंड की छवि धूमिल करें यहां के प्राकृतिक संपदाओं को लूटे यहां के आदिवासियों की जमीन,सेना की जमीन को लूटे और झारखंड का नाम बदनाम करें।
तो इन हालातों में राज्य के अंदर एक गरम दल का उदय होता है जो राज्य के बिगड़ते हालातों को सुधारने के लिए आगे आकर नेतृत्व को संभालता है कुछ ऐसा ही बस 1905 ईस्वी में बंगाल विभाजन के समय देखा गया जब कांग्रेस की कमान नरम दल से गरम दल में हस्तांतरित हो गया था। जहां एक और भारत के अन्य राज्य विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है वही झारखंड में आए दिन भ्रष्टाचार के नए आयाम लिखे जा रहे हैं नीति आयोग की रिपोर्ट हो या किसी अन्य संस्था की केरल,गुजरात, तमिलनाडु जैसे प्रदेश आगे ही आ रहे हैं वहीं देश की 32 फ़ीसदी खनिज संपदा को अपने गर्भ में समाए रखने वाला झारखंड प्रदेश का रैंक निचले स्तर पर आ रहा है कुछ इसी प्रकार का दृश्य भारत में देखने को मिला जब 1868 के बाद जापान जैसे देश ने खुद औद्योगिक विकास कर विकास के अन्य आयामों को छुआ तब भारत जैसे अन्य एशियाई प्रदेशों में भी यह चेतना जागृत हुई कि एक होकर अगर प्रयत्न किया जाए तो परिस्थिति बदल सकती है वैसे ही झारखंडी युवाओं ने सोचा कि अगर बिहार जैसे पिछड़े राज्यों में इथेनॉल का प्लांट लग सकता है उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में इन्फ्रास्ट्रक्चर में जबरदस्त विकास हो सकता है, हमारे प्रदेश में हजारीबाग पलामू जैसे जिले में क्यों नहीं, एक ही भौगोलिक सांस्कृतिक सामाजिक स्तर वाला प्रदेश उड़ीसा छत्तीसगढ़ आगे बढ़ सकता है तो झारखंड क्यों नहीं।
बंगाल विभाजन के विरोध में जैसे पूरा बंगाल एकजुट होकर तत्कालीन वायसराय लार्ड कर्जन की नीतियों का विरोध किया था आज के झारखंड में भी युवाओं या यू कहे पूरा झारखण्डी मानुष सड़कों में एकाकृत होकर व्यवस्था को बदलने के लिए पूरी तन्मयता के साथ आगे बढ़ रहा है, उनके अन्दर ऊर्जा प्रवाहित हो रही है इन ऊर्जा को एक जगह एकत्रित होते हुए देखा जा सकता है(एकता का परिचायक) उन्हें बस तलाश है एक ऐसे समय का जो तत्कालीन बंगाल के विभाजन के समय गरम दल को मुहैया कराया था जिससे उनकी उसके अंदर समाहित गुस्सा एक साथ अंग्रेजों के विरुद्ध धमाका बनकर गिरा वैसे ही धमाका करने को झारखंडी युवर लालायित हैं यह भगत सिंह भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायी सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को धमाके से जगाना चाहते हैं, उनकी मानसिकता पे कड़ा प्रहार करना चाहते हैं जो ये मानकर बैठे हैं कि झारखंड में मेरे बाप का है जो मर्जी हम करें किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि वे हमें आईना दिखा पाए, तो ऐसी मानसिकता रखने वालों के लोगों के खिलाफ एक आंदोलन का टाइगर जयराम महतो के नेतृत्व में झारखंडी युवाओं ने फूंक दिया है आगामी 18 जून को बलियापुर में प्रदेश के सारे युवाओं का जुटान एक मंच के नीचे हो रहा है आने वाले समय में यही युवा इस राज्य के एक नए आयाम को लिखेंगे एक नए पटकथा को लिखेंगे जहां पर बात जल जंगल और जमीन की होगी जहां बात माय माटी और मानुष की होगी आइए कल के बैठक को सफल बनाएं।
Comments
Post a Comment