2024 और झारखंड की राजनीति
जोहार वर्तमान समय में झारखंड की राजनीति सिर्फ़ एक योजना के इर्द गिर्द घूम रही हैं वो है मईया सम्मान योजना,ये योजना भले ही महिलाओं के सम्मान से जुड़ा हो, किंतु राजनैतिक पार्टियां इसे इतना महिमा मंडन कर के प्रस्तुत कर रही है मानो ये योजना एक ऐसी दर्द निवारक दवा है जो महिलाओं को उनके दैनिक कष्ट से छुटकारा दिला देगी।आज के समय में जब झारखंड के अधिकतर युवा परीक्षा में हुए धांधली को लेकर आंदोलनरत है,जहां पहाड़िया समाज के लोग एंबुलेंस के अभाव में खटिया पर सवार होकर ऐसे अस्पतालों में पहुंच रहे है जहां न डॉक्टर नियमित रूप से परामर्श देते है और न ही इनका समुचित इलाज हो पाता है,जहां अशिक्षा अपने चरम पे है जहां भ्रष्टाचार के आरोप में एक मुख्यमंत्री और उसके आधा दर्जन कैबिनेट के मंत्री जेल का हवा खा चुके है, जहां एक फ्लाईओवर के उद्घाटन से ही ऐसे खुशियां मनाई जाती है जैसे पूरे राज्य में सड़कों का जाल बिछा दिया गया हो, वैसे राज्य में जहां एक महिलाओं की इज्जत को तार तार किया जाता है उन्हें न्याय के लिए भटकना पड़ता है, जहां आदिवासी समाज की महिलाओं को बड़े शहरों में बेचा जाता है, वैसे राज्य में बात सिर्फ़ ₹1000 से लेकर ₹25000,₹23000 प्रति महिलाओं (प्रति वर्ष) को पैसे देकर सम्मान की बात करने वाले इन नेताओं को तनिक भी शर्म नही आती, हां माना महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त करना जरूरी है, किंतु उससे पहले अपने संसाधनों की आर्थिक स्थिति का अवलोकन करना भी बेहद जरूरी है, कल के समय में जब आबादी बढ़ेगी, स्वास्थ, शिक्षा, सड़क, रोज़गार सृजन की मांग बढ़ेगी, इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए पूंजी की आवश्कता होंगी वैसे समय में अगर राज्य फाइनेंशियल क्रर्सिस से झुझेगी तब हम झोली फैला कर केन्द्रीय सरकार की ओर देंखेंगे, लोन लेने की बात होगी, और फिर राज्य का अधिकार राजस्व लोन की किस्तिया चुकाने में खत्म हो जाएगी, तब कार्पस फंड में जमा ₹2300 करोड़ भी बोना साबित होगा, एक ओर जहां बेरोजगारी के मार झेल रहे युवा मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना का लाभ नहीं लें पाने से परेशान है, सीएनटी एसपीटी एक्ट में शामिल ज़मीनों में लोन न ले पाने का इल्म जनजातियों को वैसे प्रदेश में फाइनेशियल इंक्लूजन का विजन सिर्फ़ ₹1000 आका गया है ऐसे विजन और ऐसे विजनरी नेताओं को मेरा नमन, आज जब पुरा विश्व एआई की ओर अग्रसर है, हाइड्रोजन से गाड़ी चलाने की बात कर रहा है, सोलर, लूनर प्रोजेक्ट्स लॉन्च हो रहे है, न न प्रकार के शोध हो रहे है, फैक्ट्रियां लग रही है, रोज़गार का सृजन हो रहा, अस्पताल खुल रहे है, रोबोटिक्स ऑपरेशन सफल हो रहे है, वैसे समय में एक प्रदेश में आज भी भुख के कारण मौतें हो रही है वो भी तब जब केंद्र सरकार 80 करोड़ लोगों को गरीब कल्याण योजना के तहत राशन दे रही और बाकि छूटे हुए को राज्य सरकार के ग्रीन कार्ड से अंच्छादित करते हुए राशन दिया जा रहा है,जहां हर घर नल जल योजना संचालित है वहां पहाड़िया समुदाय के लोग चुवा का पानी पी कर डायरिया का शिकार हो रहे है, वैसे प्रदेश में विजनरी नेताओं की कमी से ही आज प्रदेश का ये हाल है की हर चुनाव से पुर्व वादों का एक पिटारा तो खुलता है परन्तु चुनाव के बाद वो बंद हो जाता है। शायद किसी दार्शनिक ने सही ही कहा रहा एक राजा दार्शनिक या दार्शनिक विद्या में निपूर्ण होना चाहिए, एक मूर्ख राजा अपने अज्ञान भरी ज्ञान से समाज को सही दिशा में नही ले जा सकता है, उससे न्याय और विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती है। आज के समय में ये अवधारणा झारखंड में फिट बैठती है।
Comments
Post a Comment