एक पेड़ की दस्ता
आख़िर हुआ क्या है इस समाज को,
अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु,
मेरी प्राणों की आहुति देना,क्या यह सार्थक है?
आप मनुष्यो के लिए तो कोर्ट कचहरी भी है जहां आप अपने फरियादो को लेकर जाते है आख़िर मै किस कोर्ट को जाऊ,किसे अपनी फरियाद और पीड़ा को सुनाऊं? भूलो मत उन बचपन के दिनों को आम, अमरूद,केला और ना जाने कितने फलों का सेवन हमारे मित्रो ने तुम सबको कराया था,भूलो मत उस चिलचिलती धूप को जिससे बचने के लिए तुम हमारे शरण में आया करते थे क्या तुम भूल गए सब कुछ हां क्यों नहीं भूलोगे तुम स्वराथी जो हो गए हो, तुम्हारी महत्वाकांक्षा तुम्हें अन्धकार की और ले जा रही है इसलिए तो पुराने दिन तुम्हेंरे स्मरण में नहीं है। तुमलोग तो कहते हो कि जीव हत्या महापाप है आरे यार में भी तो जीव ही हूं फिर मुझे और मेरे मित्रों को क्यों मरते हो आख़िर हमारा गुनाह क्या है? अगर एक पेड़ होना गुनाह है और उसकी सज़ा उसको काट कर देना है तो तुम भी सुन लो तुम्हरा अस्तित्व भी मेरे से जुड़ा हुआ है अगर मै रहूंगा तो तुम रहोगे, हाल के दिनों में मेरी अहमियत को तुम लोगों ने समझ ही लिया होगा जब अमेजन और ऑस्ट्रेलिया की बुश फायर ने तुमलोगो को मेरे प्रति जागरूक कर दिया था,फिर भी तुमलोग क्यों नहीं सुधरते हो? बाते तो बहुत बड़ी बड़ी करते हो कि पेड़ लगानी चाहिए मगर सच बोलना क्या आज तक तुमने कभी एक भी पेड़ लगाया है? तुमलोग की एक बहुत ही गंदी आदत है तुमलोग हमेशा दूसरे की आश में रहते हो की मै नहीं तो कोई और ज़रूर लगाएगा आरे पगले बूंद बूंद से सागर बनता है,तुम्हरे दोस्त भी तुम्हरे तरह ही है जो दूसरो के आशा में बैठे हुए है,तुमलोग तो बस विकास की बाते करते हो और उसके लिए अगर हमारे प्राणों की बलि भी देने पड़े तो यह जायज है,विकास की अगर यही परिभाषा रही तो हमलोग जल्द ही विलुप्त होते नज़र आयेंगे अगर हम विलुप्त हुए तो सनम तुम्हे भी विलुप्त करते चलेजाएंगे afterall I'm your lifeline yarr. पता है मित्रो मेरी हालत उस बूढ़े मां बाप की तरह है जिसे उसके बच्चे बड़े होने के बाद उनकी आहमियत को भुला देते है बचपन से लेकर जवानी तक जिसे इतनी सुख सुविधा दिया आज वहीं बुलडोजर और कुल्हाड़ी लेकर मेरे सीने को चल्ली करने को तैयार बैठा है। खैर यह मारने काटने का दौर तो यूं ही चलता रहेगा आज का दौर तुम्हरा है कल मेरा भी दौर आएगा फिर रोना तुम और कहते फिरना पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ अभी भी समय है सुधार जाओ जागरूक बनो और बनाओ । खैर मेरी दास्तान ए दर्द का सिलसिला तो लंबा है मित्रो काश मेरी भी शरीर से लाल रंग के खून निलकते तो शायद इंसानों को मेरी कद्र होती लेकिन फिर कभी कभी सोचता हूं यहां तो इंसान ही इंसान के हत्यारे बन बैठ रहे है तो क्या उस हालत में मेरी सहायता के लिए क्या कोई आता??जाते जाते एक ही बात बोलूंगा की मेरे बिना अपने जीवन के एक अंश को ज़रूर सोचिएगा ।धन्यवाद आपका मित्र आप मुझे पेड़ भी बोल सकते है और पैधा भी।
अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु,
मेरी प्राणों की आहुति देना,क्या यह सार्थक है?
आप मनुष्यो के लिए तो कोर्ट कचहरी भी है जहां आप अपने फरियादो को लेकर जाते है आख़िर मै किस कोर्ट को जाऊ,किसे अपनी फरियाद और पीड़ा को सुनाऊं? भूलो मत उन बचपन के दिनों को आम, अमरूद,केला और ना जाने कितने फलों का सेवन हमारे मित्रो ने तुम सबको कराया था,भूलो मत उस चिलचिलती धूप को जिससे बचने के लिए तुम हमारे शरण में आया करते थे क्या तुम भूल गए सब कुछ हां क्यों नहीं भूलोगे तुम स्वराथी जो हो गए हो, तुम्हारी महत्वाकांक्षा तुम्हें अन्धकार की और ले जा रही है इसलिए तो पुराने दिन तुम्हेंरे स्मरण में नहीं है। तुमलोग तो कहते हो कि जीव हत्या महापाप है आरे यार में भी तो जीव ही हूं फिर मुझे और मेरे मित्रों को क्यों मरते हो आख़िर हमारा गुनाह क्या है? अगर एक पेड़ होना गुनाह है और उसकी सज़ा उसको काट कर देना है तो तुम भी सुन लो तुम्हरा अस्तित्व भी मेरे से जुड़ा हुआ है अगर मै रहूंगा तो तुम रहोगे, हाल के दिनों में मेरी अहमियत को तुम लोगों ने समझ ही लिया होगा जब अमेजन और ऑस्ट्रेलिया की बुश फायर ने तुमलोगो को मेरे प्रति जागरूक कर दिया था,फिर भी तुमलोग क्यों नहीं सुधरते हो? बाते तो बहुत बड़ी बड़ी करते हो कि पेड़ लगानी चाहिए मगर सच बोलना क्या आज तक तुमने कभी एक भी पेड़ लगाया है? तुमलोग की एक बहुत ही गंदी आदत है तुमलोग हमेशा दूसरे की आश में रहते हो की मै नहीं तो कोई और ज़रूर लगाएगा आरे पगले बूंद बूंद से सागर बनता है,तुम्हरे दोस्त भी तुम्हरे तरह ही है जो दूसरो के आशा में बैठे हुए है,तुमलोग तो बस विकास की बाते करते हो और उसके लिए अगर हमारे प्राणों की बलि भी देने पड़े तो यह जायज है,विकास की अगर यही परिभाषा रही तो हमलोग जल्द ही विलुप्त होते नज़र आयेंगे अगर हम विलुप्त हुए तो सनम तुम्हे भी विलुप्त करते चलेजाएंगे afterall I'm your lifeline yarr. पता है मित्रो मेरी हालत उस बूढ़े मां बाप की तरह है जिसे उसके बच्चे बड़े होने के बाद उनकी आहमियत को भुला देते है बचपन से लेकर जवानी तक जिसे इतनी सुख सुविधा दिया आज वहीं बुलडोजर और कुल्हाड़ी लेकर मेरे सीने को चल्ली करने को तैयार बैठा है। खैर यह मारने काटने का दौर तो यूं ही चलता रहेगा आज का दौर तुम्हरा है कल मेरा भी दौर आएगा फिर रोना तुम और कहते फिरना पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ अभी भी समय है सुधार जाओ जागरूक बनो और बनाओ । खैर मेरी दास्तान ए दर्द का सिलसिला तो लंबा है मित्रो काश मेरी भी शरीर से लाल रंग के खून निलकते तो शायद इंसानों को मेरी कद्र होती लेकिन फिर कभी कभी सोचता हूं यहां तो इंसान ही इंसान के हत्यारे बन बैठ रहे है तो क्या उस हालत में मेरी सहायता के लिए क्या कोई आता??जाते जाते एक ही बात बोलूंगा की मेरे बिना अपने जीवन के एक अंश को ज़रूर सोचिएगा ।धन्यवाद आपका मित्र आप मुझे पेड़ भी बोल सकते है और पैधा भी।
Comments
Post a Comment