नॉर्थ ईस्ट दिल्ली की t

आज नॉर्थ ईस्ट दिल्ली की घटना काफ़ी निंदनीय थीं,पुलिस वाले जो ख़ुद की जान जोखिम में डालकर हमारी रक्षा करते है उनके ऊपर कुछ असामाजिक तत्व ने हमला किया आख़िर क्यों? आरे मूर्ख जब 26/11 का हमला हुआ था तब तुम्हारी रक्षा करने सर्वप्रथम यहीं पुलिस वाले आए थे क्या तुम भूल गए? भूल गए कैसे भूल सकते हो भाई तुम ??

गांधी के अहिंसावादी देश में हिंसा क्यों फैल रहा है,
कुछ मंदबुद्धि वाले लोग बंदूक लिए क्यों हिंसा फैला रहा है,
हाथ में बंदूक लिए आज कोई ललकार रहा है,
वो सोच रहा है की हम हम है।
उसके लिए न कोई कानून है न कोई कोर्ट कचहरी,
संविधान खतरे में है कह कर आज खुद,
संविधान के विरोध खड़ा है,
देश की अखंडता को ललकार रहा है,
वो हमारे पुलिस वालों पर बंदूक तान खड़ा है,
हमारे पुलिस भाई भी उनके बंदूक के आगे अपना सिना ताने खड़ा है,
फ़र्क देखो मित्र तूने बंदूक चला दी किन्तु पुलिस भाई ने नहीं चलाई,
पूछोगे नहीं क्यों?
पता नहीं तुमलोग कौन हो कहां से आए हो,
और मुझे तुम जैसे लोगो के बारे में जानने में भी कोई दिलचस्पी नहीं है आख़िर हो भी क्यों?
यह वे लोग है जो बेरोजगार बैठे है,
जिन्हे कोई काम धंधा नहीं है।
कोई काम धंधा नहीं है तो क्या आप पब्लिक प्रॉपर्टी को जलाएंगे?
आरे भाई यह सब यू ही नहीं आ जाते है पैसे लगते है खरीदने के लिए,
तुम्हें कहा से पता चलेगा तुम तो बेरोजगार हो,
पता नहीं तुम्हारे पास फिर बंदूक खरीदने
के पैसे कहा से आ गई,
सुनो तुम जो भी हो, जहां से भी हो,
रुक जाओ,और देश में शांति व्यस्था कायम रहने दो,
जियो और जीने दो,अपने काम से काम रखो,
गांधी की मूर्ति पे माल्यार्पण करने वाले उनके अहिंसावादी विचारधारा को भूल गए?
सुनो हम भगत सिंह के भी अनुयाई है,
क्रांतिकारी हम भी हो सकते है ,
लेकिन हम शांति में विश्वास रखते है,
यहीं फ़र्क है हमारे और तुम्हरे में।

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