वर्तमान राजनीति और झारखंड
वर्तमान समय की राजनीति अवसरवादिता से ग्रस्त हो गई है,राजनेता अब सिद्धांतवादी नहीं रहे, पद की लालसा,बढ़ती महत्वकांक्षा नेताओं को बाध्य करता है कि वे अपने लालसा पर अंकुश ना लगाए।अभी ताज़ा उदहारण महाराष्ट्र की है कि किस तरह से बरसो से जिस पार्टी का विरोध करते हुए अपने राजनीतिक पकड़ शिवसेना ने बनाई थी वह सब एक ही झटके में विरोधी सुर मेल मिलाप की बात करने लगे क्यों? अरे भैया सीएस जो बनना था उद्धव जी को।अगर झारखंड की बात करे तो यहां भी एक राजनीतिक दल झारखंड विकास मोर्चा चर्चा में है कि वह जल्द ही बीजेपी में विलय हो जायेगी,इस बार के विधासभा चुनाव के दौरान ही मैंने पर्सनली बाबूलाल मरांडी जी को प्रभात खबर के एक पत्रकार को दिए सक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि बाबूलाल कभी राजनीतिक सौदेबाजी नहीं की खेर यह तो ईश्वर ही जाने की आखिर क्या मजबूरी है बाबूलाल मरांडी जी का की वह बीजेपी में जेवीएम का विलय करना चाहते है जबकि उनके पार्टी के विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव जेवीएम का विलय आईएनसी में करना चाहते है,जिसको बाबूलाल मानने को तैयार नहीं है क्यों? क्योंकि अगर बाबूलाल आईएनसी में विलय करते है तो बाबूलाल को हेमंत सोरेन के अंदर काम करना होगा जो एक पूर्व मुख्यमंत्री को कतई स्वीकार नहीं होगा,वहीं बीजेपी को एक आदिवासी नेता की तलाश है जो बाबूलाल के रूप में उन्ने मिल जाएगी वहीं इनको विधायकों का राजनीति भी बीजेपी विरोधी नारो से चलता है उनका कहना है कि वे मर जाएंगे पर बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे,यही कारण है कि अभी का मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है सब १६-२० तक का प्रतीक्षा कर रहे है,इधर बाबूलाल जी आशा किए हुए की वे नेता प्रतिपक्ष के नेता चुने जाएंगे वहीं प्रदीप और बंधु जी यह आशा किए हुए है की वह लोग मंत्री पद पाएंगे अगर वे जेएमएम या आईएनसी के साथ जाएंगे,अब इन दो गुटों में से अवसरवादी और सिद्धांतवादी कौन है यह तो आने वाले समय में साफ हो जाएगा खेर आज मकरसंक्रांति है आप सभी मित्रो को मकरसंक्रांति की हार्दिक बधाई।
शुभ रात्रि मित्रो
मनीष
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मनीष
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