Jharkhand

झारखंड राज्य के गठन के दो दशक इस वर्ष पूरे हो जाएंगे,विगत कई सालो में राज्य ने कई सारे उपलब्धियां हासिल की है, झारखंड ने इतिहास के पन्नों में कई सारी कृतिमान स्थापित किए और कई सारे आशा और उम्मीदों को लिए हुए विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर हो रहा है,किन्तु कई सारे उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद झारखंड आज भी पिछड़े राज्यो के श्रेणी में आता है,राज्य में सस्ता श्रम,खान खनिज है,फिर भी राज्य इस पिछड़ेपन का शिकार क्यों है?सवाल के तह तक जाएगा तो जवाब खुद ब खुद मिल जाएगा राज्य गठन के बाद से ही ना जाने कितने मुख्यमंत्री बने,न जाने कितने आयूक्त,डीजीपी, सीएस, बदले,राज्य में वर्तमान समय में भी नक्सलियों का बोलबाला है,उनकी आवाज पर राज्य के अंदर की सांसे ठहर जाती है,हत्या,अपराध,और करप्शन का बोल बाला,नेता
ओ की महत्वकांक्षा यह सारे प्रमुख कारणों में से एक है जो इस राज्य के विकास में बाधा उत्पन्न किए हुए है,अच्छे सुशासन की भूख अलग राज्य के आंदोलन में से एक था पर विसंगति यह है कि यही डोमेसाइल के दिनों में राज्य अशासित बन गया था।वर्ष 2000 में ही बाबूलाल जी ने सिंगापुर का दौरा करने के बाद कहा था कि 2010 तक झारखंड सिंगापुर जैसे अग्रणी देशों के आसपास पहुंच जाएगा किन्तु आज एक दशक के बाद भी राज्य सिंगापुर तो दूर की बाद है झारखंड के साथ बनी छत्तीसगढ़ के समकक्ष नहीं पहुंच पाई
 है।झारखंडी भाषा साहित्य समाज की अभिवयक्ति जिस व्यापक फलक पर होनी थी वह नहीं को का सकी लोक संस्कृति,लोकभाषा के विकास के लिए झारखंड में सुयोजित तरीके से काम किए जाना चाइए था,जिस दिशा में प्रयास ही नहीं किए गए।इसके बिना झारखंड के सृजन का सपना पूरा नहीं किया जा सकता है।हमलोगो की को कल्पना,भावना,आकांशा थी झारखंड को गढ़ने की वह सब धरी की धरी रह गई।सोचा था कुछ हुआ कुछ,और हो रहा है कुछ।झारखंड अलग राज्य आन्दोलन की लिए जिन्होंने कुर्बानी दी,अलग झारखंड राज्य ने उनकी कुर्बानी की कीमत नहीं समझी,शहीदों ने सोचा था शोषणविहीन,सेकुलर, और भाषा संस्कृति परंपरा व झारखंडी पहचान को स्थापित करने का झारखंड होगा जहां जल जंगल जमीन और जंतु की रक्षा होगी,किन्तु शोषणविहनता की जगह शोसंजनित झारखंड दिखाई दे रहा है जो विस्थापन से ग्रस्त है नेता और ब्यूरोक्रेट्स करप्शन में मस्त है ऐसे में झारखंड का भविष्य अंधकार मय ही दिखाई पड़ रहा है।

शुभ रात्रि
मनीष अर्या

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